प्रस्तावना

वर्ष 1972 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह विभाग बतौर ग्रामीण अभियंत्रण सेवा सृजित किया गया था, जिसका प्रशासनिक नियंत्रण ग्रामीण विकास मंत्रालय के आधीन था।

इसके लिए एक अलग मंत्रालय, लघु सिंचाई एवं ग्रामीण अभियंत्रण सेवा, गठित किया गया और आखिरी में ग्रामीण अभियंत्रण सेवा मंत्रालय का गठन हुआ।

वर्ष 2011 में विभाग का नाम ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से बदल कर ग्रामीण अभियंत्रण विभाग कर दिया गया।

इस विभाग का मुख्य कार्य निक्षेप के आधार पर निर्माण कार्यों को संपादित करना है और जिला और खंड स्तर पर प्रशासनिक अफसरों को जिस तरह और जब कभी भी जरूरत पड़े उन्हें तकनीकि दिशा निर्देश प्रदान करना।

यह मुख्यता ग्रामीण विकास, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा, पंचायती राज, राजस्व, पर्यटन, मिल्क एण्ड डेरी, उद्योग, मत्स्य, मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभागों के निर्माण कार्यों को संपादित कराता है।

आर्थिक और सामाजिक सेवाओं के उपयोगों का बढ़ावा देने के द्वारा ग्रामीण सड़क संपर्क, ग्रामीण विकास का सिर्फ एक घटक नहीं बल्कि कृषि की आय और उत्पादक रोजगार को भी बढ़ावा देता है। इस परिस्थिति को वापस सुधारने के लिए और ऐसे निवासियों को हमेशा कनेक्टिविटि प्रदान करने हेतु (जो मार्गों से कनेक्टड नहीं हैं) केंद्र सरकार ने एक योजना (प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना) जारी की है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग इस योजना को वर्ष 2002 से 34 जिलों में क्रियान्वयन कर रही है।

 

समाज के प्रत्येक हिस्से को बढ़ावा देने के लिए और कनेक्टिविटि, पेयजल, बिजली, स्वच्छता, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार, पेंशन और छात्रवृत्ति आदि जैसी मूल सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ राम मनोहर लोहिया समाग्र ग्राम विकास योजना का आरंभ किया है। इस योजना के तहत ग्रामीण अभियंत्रण विभाग सीसी रोड/अंदर की गलियों में ड्रेन/ डॉ राम मनोहर लोहिया गांव की कुछ चयनित सड़कों के निर्माण कार्यों को संपादित करने का कार्य करता है।

 

ग्रामीण अभियंत्रण विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख निर्माण एजेंसी है। यह उचित समय प्रबंधन, कॉंट्रेक्ट प्रबंधन और गुणवत्ता प्रबंधन के साथ सरकारी योजनाओं को क्रियन्वयन करता है, जो कि किसी भी योजना को सफलतापूर्वक संपादित करने के लिए जरूरी होते हैं।