गुणवत्ता प्रबंधन

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यों हेतु

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना एक त्रिस्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता अनुश्रवण क्रियाविधी को परिकल्पित करता है।

  • प्रथम स्तर- पीआईयू/वरिष्ठ अभियंता पीआईयू कार्यों का प्रभारी होता है। कॉंट्रेक्टर को गुणवत्ता प्रयोगशाला स्थापित करनी पड़ती है और अनुबंधात्मक निर्धारित परीक्षण करना होता है। परीक्षण परिणामों को निर्धारित गुणवत्ता नियंत्रण रेजिस्टर में रिकॉर्ड करना होगा। गुणवत्ता नियंत्रण हैंड बुक में परीक्षण का रिकॉर्ड पीआईयू के अभियंता के सामने होता है। सभी समबंधित अफसर गुणवत्ता नियंत्रण रेजिस्टर में अपना अनुभव रिकॉर्ड करते हैं।
  • द्वितीय स्तर- पीयूआई से अलग, नोडल एजेंसी द्वारा चयनित एसक्यूसी और उस्के स्टाफ द्वारा आवधिक निरीक्षण कराया जाता है।
  • तीसरा स्तर- एनएनआरडी राज्य/केंद्र संगठनों (नेशनल क्वॉलिटी मॉनिटर्स) के साथ सेवानिवृत्त वरिष्ठ अभियंताओं को किसी उद्देश्य से सम्मिलित करता है। एनक्यूएम पीएमजीएसवाई के कार्यों की प्राथमिकता के अनुसार गुणवत्ता परीक्षण करता है, खासतौर पर कार्यक्रम के क्रियान्वयन होने और राज्य गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली की संतोषजनक कार्यविधी को सुनिश्चित करने के लिए। विभिन्न कार्य स्तर पर समस्याओं के समाधान हेतु रचनात्मक सुझाव देने के लिए भी एनक्यूएम से अपेक्षा की जाती है। एसक्यूसी की यह जिम्मेदारी होती है कि वह एनक्यूएम द्वारा उठाए गए मुद्दों की रिपोर्ट बनाए और उस पर एनआरआरडीए के अवलोकन को जाने।

अन्य कार्यों हेतु

कार्यों की गुणवत्ता और वरिष्ठ अघिरियों द्वारा नियमित रूप से निरीक्षण को सुनिश्चित करना। फील्ड/जिला प्रयोगशालाओं और आस-पास के संस्थानों/इंजिनियरिंग कॉलेजों में गुणवत्ता नियंत्रण परीक्षण को करवाया जाता है। रिजस्टर में रिकॉर्ड को अनुरक्षित किया जाता है। इसके अतिरिक्त तकनीकि ऑडिट सेल (टीएसी) द्वारा नियमित निरीक्षण और तकनीकि ऑडिट भी किये जाते हैं। यह सेल प्रमुख सचिव, आर.ई.डी., उत्तर प्रदेश सरकार के आधीन मुख्य तकनीकि परीक्षक द्वारा नेतृत्व की जाती है और तकनीकि परीक्षक और सहायक तकनीकि परीक्षक द्वारा सहायता प्राप्त होती है।

टीएसी का यह दायित्व है कि वह संचालित / संपादित कार्यों का नियमित निरीक्षक और ऑडिट करे। सामग्री के नमूने जो संयोजित किए जाते हैं और प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता कार्यों के लिए इनका परीक्षण होता है।

टीएसी का यह भी दायित्व है कि वह शिकायतों पर जांच करा सके और ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग, लघु सिंचाई विभाग और भू-जल विभाग के स्टाफ पर जांच बैठा सके। अनुपालन और उचित कार्रावई के लिए जांच रिपोर्ट को प्रमुख सचिव, आर.ई.डी. को सौंपी जाएगी।